आगमन पर राम भक्तों का अभिनंदन करेगा भरत द्वार, फरवरी में हो सकता है उद्घाटन।

अयोध्या।
अयोध्या श्रीरामनगरी में आने वाले राम भक्तों के स्वागत के लिए अयोध्या–सुल्तानपुर मार्ग (मैनुदीनपुर प्रयागराज मार्ग) पर भरत द्वार का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं में शामिल यह भव्य प्रवेश द्वार गेट कॉम्प्लेक्स (टीएफसी) क्षेत्र में बनाया जा रहा है। पर्यटन विभाग की इस परियोजना का निर्माण यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
भरत द्वार का निर्माण 4.410 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है, जिस पर लगभग 2024.90 लाख रुपये की लागत आ रही है। परियोजना का करीब 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार शर्मा के अनुसार अगले माह फरवरी 2026 तक निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके बाद लोकार्पण की संभावना है। यह द्वार अयोध्या में प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रथम स्वागत स्थल होगा, जहां भगवान राम के अनुज भरत की भक्ति और मर्यादा का प्रतीकात्मक संदेश मिलेगा।
राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा छह प्रमुख मार्गों पर रामायण से प्रेरित प्रवेश द्वारों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें राम द्वार, लक्ष्मण द्वार, शत्रुघ्न द्वार, भरत द्वार, सीता द्वार और हनुमान द्वार शामिल हैं। अयोध्या–सुल्तानपुर मार्ग पर स्थित भरत द्वार इसी श्रृंखला का अहम हिस्सा है, जहां रामायण काल की थीम पर आधारित नक्काशी, मूर्तियां और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।
राम जन्मभूमि मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में भव्य प्रवेश द्वार न केवल शहर की पहचान को सशक्त करेंगे, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगे। परियोजना के तहत आसपास हरित क्षेत्र, पार्किंग, शौचालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।
परियोजना के तहत दो गेट, सड़क, सीवर, ड्रेनेज, सिंचाई लाइन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, बाउंड्री वॉल, फायर फाइटिंग और ईएसएस का कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं एसटीपी का 85 प्रतिशत, यूजीटी का 90 प्रतिशत, पार्किंग का 80 प्रतिशत और आंतरिक विद्युतीकरण का 70 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है।